| ऑफिस से देरी से निकला, नापसंद बारीष बरस रही थी |
| बारीष ने मुझे कर दिया पुरा गीला, मैने बारीष को दी गाली | |
| रस्ते पे सिर्फ बारीष ही थी, ना कोई बस थी, ना कोई ऑटो खाली || |
| चलते चलते मैने देखी, एक मासुम खुबसुरत लडकी अकेली | |
| फिक्र मे लग रही थी, शायद वो भी दे रही थी बारीष को गाली || |
| सोच मे पड गया मै, फस गयी है ये फसा रही है, मैने जाकर कर ली बात | |
| सचमुच फसी थी वो, मैने घर तक उसका दे दिया साथ || |
| "शुक्रिया आपका" ऐसे मुस्कुराते वो बोली | |
| कुछ नही बस कलेजा चुरा ले गयी उसकी मुडती हुई कानोंकी बाली || |
| अब तो बारीष मेरे दिल मे है, ना देता हु कभी बारीष को गाली | |
| क्योंकी कुछ ही दिन पहले उसकी बहन बन गयी मेरी साली || |
Wednesday, June 12, 2013
बारीष को गाली
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