धुळवडीच्या निमित्ताने
वेगवेगळे अंतरंग असलेल्या
रंगांवरील चारोळ्या
| प्रत्येकाचा रंग वेगळा | |
| प्रत्येकजण आहे आगळा | उधळुया रंग अन गुलाल |
| मात्र जेव्हा होतात गोळा | होउनी लालेलाल |
| हा कुठला अन तो कुठला | रंगात रंगुनी |
| आपण करुया धमाल | |
| जरा भान ठेवावे | |
| असताना आपल्याच मस्तीत दंग | |
| क्षणाचाही वेळ लागत नाही | रंगांचा सण हा |
| व्हायला रंगाचा बेरंग | रंगात रंगून जाऊया |
| आपल्या सप्तरंगी आयुष्यात ह्या | |
| आनंदाचे रंग भरुया | |
| रंगात रंगलेली तू | |
| आज अजूनच सुंदर दिसत आहेस | |
| काय जादू झाली आहे कळत नाही | |
| आज रंग देखील जास्त खुललेले आहेत | |
happy Rangpanchami Sid....
ReplyDeleteSundar!!!
ReplyDeletevery nice.........
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